Renditions

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Location: Mumbai, Maharashtra, India

Sinjhini - the sound of an anklet, feeble, melodious but yet distinct.. distinct because its her own identity, her own voice, although immaterial and banal... yet its hers

Wednesday, November 23, 2005

पूछे जो कोइ मेरी निशानी रंग हीना लिखना
गोरे बदन पे उन्गलि से मेरा नाम अदा लिखना
कभी कभी आस पास चान्द रेह्ता है
कभि कभि आस पास शाम रेह्ति हैन
आओ न आओ न
झेलुम मेइन बेह्ने दे
वादि के मौसम भि एक दिन तोह बद्लेन्गे
कभि कभि आस पास चन्द रेह्त हैन
कभि कभि आस पास शाम रेह्ति हैन

आउ तोह सुबह जाउ तोह मेर नाम सबह लिख्न
बर्फ़ पङे तो बर्फ़ पे मेर नाम दुआ लिखना
ज़र ज़र आग वाग पस्स रेह्ति हैन
ज़र ज़र आन्ग्दि कि आन्च रेह्ति हैन
कभि कभि आस पास चन्द रेह्त हैन
कभि कभि आस पास शाम रेह्ति हैन
शामेइन बुझने आति हैन रातेइन
रातेइन बुझने तुम आ गये हो

जब तुम हस्ते हो दिन हो जात हैन
तुम गले लगो तोह दिन सो जात हैन
दोलि उथने आयेग दिन तोह
पस्स बिथ लेन
कल जो मिलेय तोह
मथे पे मेरे सुरज उग देन
(ज़र ज़र आस पास धुप रहेगि
ज़र ज़र आस पास रन्ग रहेन्गे) - २

Chalo ek baar phir se,,,,

चलो एक बार फिर से, अजनबी बन जायें हम दोनों -२

ना मैं तुमसे कोइ उम्मीद रखूँ दिलनवाज़ी की
ना तुम मेरी तरफ़ देखो गलत अन्दाज़ नज़रों से
ना मेरे दिल कि धद्कन लद्खदाये मेरि बातोन मेइन
ना ज़ाहिर हो तुम्हारी कश्म-कश का राज़ नज़रों से
चलो एक बार फिर से..

तुम्हें भी कोइ उलझन रोक्ती है पेश्कद्मी से
मुझे भी लोग केह्ते है, की ये जलवे पराये हैं
मेरे हमराह भी रुस्वाइयाँ हैं मेरे माझी की -२
तुम्हारे साथ भी गुज़री हुइ रातों के साए हैं
चलो एक बार फिर से..

टार्रुफ़ रोग हो जाये तो उस्को भूल्ना बेह्तर
टाल्लुक बोझ बन जाये तो उस्को तोद्ना अच्च्ह
ओह अफ़्सान जिसे अन्जाम तक लान न हो मुम्किन -२
ऊसे एक खूब्सूरत मोद देकर च्होद्न अच्च्ह
छलो एक बार फिर से..

Wednesday, November 02, 2005

सच ये है बेकार हमे गम होता है -२
जो चाहा था दुनिया मै कम होता है
सच ये है बेकार हमे गम होता है

ढल्ता सुरज फैला जंगल रस्ता गुम -२
हमसे पूछो कैसा आलम होता है -२

गैरों को कब फ़ुर्सत है दुख देने की
जब होता है कोइ हमदम होता है
सच ये है बेकार हमें गम होता है

ज़ख्म तो हमने इन आँखों से देखे हैं -२
लोगों से सुनते हैं मरहम होता है -२

ज़हन कि शाख्होण पर अश_आर आ जाते हैन -२
जब तेरि यादोण का मौसम होता है -२
जो चाहा था दुनियाण मेइन कम होता है
सच ये है बेकार हमे गम होता है